पत्रकार बलजीत अटवाल।
श्रीगंगानगर, राजस्थान।

प्रवीण कुमार मर्डर केस में 25 फरवरी को पुलिस थाना घड़साना के 02 हैड कांस्टेबल लाइन हाजिर कर दिए गए हैं। हत्यारोपी विशाल गोदारा को राउंडअप किया गया। केस उलझने पर बीच बचाव करने उतरे अपर पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र कुमार दादरवाल ने सक्रियता दिखाते हुए आक्रोशित लोगों से समझाइश की। मुख्यतः दादरवाल के सुपरविजन में ही जांच आगे बढ़ रही है। 03 सदस्यीय मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। दोनों लाइन हाजिर किए गए हैड कांस्टेबल शेर सिंह और सीता राम के विरुद्ध विभागीय जांच डिप्टी एसपी प्रशांत कौशिक कर रहे हैं। वहीं मर्डर केस की जांच डिप्टी एसपी प्रतीक मील कर रहे हैं।
इस मर्डर केस के प्रमुख बिंदु निम्न प्रकार से हैं –
• 21 फरवरी को गुमशुदगी दर्ज किए जाने के बाद 24 फरवरी को प्रवीण कुमार का शव मिला तो 03 दिन तक पुलिस के जिम्मेदार अधिकारियों ने इस गुमशुदगी मामले में क्या किया यह जांच का विषय है।
• जो पूर्व परिचित युवक प्रवीण कुमार को अनूपगढ़ ले गए थे उनके बारे में परिजनों को भी पर्याप्त जानकारी होगी जो जांच में सहायक सिद्ध होगी। ये युवक नशा प्रवृत्ति में लिप्त बताए गए हैं, लेकिन प्रवीण कुमार उनके कारोबार में सहयोगी था अथवा नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। संभवतः उनमें पैसे के लेन-देन संबंधी विवाद हुआ होगा।
• यह माना जा रहा है कि प्रवीण कुमार की हत्या कर उसे आत्महत्या अथवा नशे की ओवरडोज से हुई मौत दर्शाने के लिए उसकी कलाई में एक इंजेक्शन लगाया गया, जो पुलिस ने बरामद किया है। इसमें शेष रही दवाई का परीक्षण किए जाने पर ही मालूम होगा कि यह क्या है।
• जहां से प्रवीण कुमार का शव मिला है, वहां नजदीक के एक ईंट भट्ठे के मजदूरों ने बताया कि 23 फरवरी को देर रात सेना के बंकर के पास एक गाड़ी को आता देखा गया है। यह भी कहा गया है कि इस संबंध में ईंट भट्ठे पर लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच भी की जानी चाहिए।
• पुलिस पर आरोपियों को बचाने के आरोप के चलते ही दो हैड कांस्टेबल लाइन हाजिर कर दिए गए हैं, तो क्या उन्होंने गुमशुदा को ढूंढने में लापरवाही बरती और फिर आनन-फानन में शव का पोस्टमार्टम कराने की कोशिश की थी? यदि ऐसा हुआ है तो इस संबंध में उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
• इस केस में मृतक के परिजनों को मुआवजा देने की मांग भी उठाई गई थी, लेकिन आखिरकार इस संबंध में कोई जानकारी साझा नहीं की गई। मुआवजा देने से बेहतर है कि वास्तविक हत्यारोपी लोगों को गिरफ्तार कर उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए।
• इस केस में सर्वसमाज द्वारा एकजुट होकर पुलिस प्रशासन प दबाव बनाया गया जो काबिले तारीफ है। ऐसे मामलों में सभी को जात पात, धर्म और राजनीति से परे रहकर पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने के लिए एकजुट होकर संघर्ष करना चाहिए।