सत्ता का खेल : भारतीय किसान संघ के नेताओं की हकीकत



पत्रकार बलजीत अटवाल।

श्रीगंगानगर, राजस्थान।


प्रखर वक्ता, सीपीआई एम नेता एवं पंचायत समिति, श्रीविजयनगर सदस्य पृथ्वीराज बुडानिया ने आईजीएनपी के प्रथम चरण में रबी फसलों के लिए सिंचाई पानी की मांग पर आंदोलित किसानों के संघर्ष को मैनेज करने की सरकार की कोशिश पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। उन्होंने भारतीय किसान संघ को भाजपा का ही एक संगठन करार दिया है और कहा है कि यह संगठन किसान आंदोलन को बदनाम करने के लिए ही सक्रिय रहता है।
उन्होंने हाल ही में एडीएम कार्यालय, अनूपगढ़ में जिला कलेक्टर की मौजूदगी में किसान आंदोलन के नेताओं से हुई वार्ता के संदर्भ में कहा है कि हमें जनसंघर्षों को मैनेज करने में सरकारों के पैटर्न को समझना चाहिए।
बुडानिया ने कहा कि आईजीएनपी के प्रथम चरण में सिंचाई पानी के संकट को देखते हुए किसानों में आंदोलन को लेकर सुगबुगाहट शुरू होती है। विभागीय आला अधिकारियों तक ये खबर पहुंचती है। आंदोलन न हो इसके लिए भाजपा का संगठन भारतीय किसान संघ प्रचार में उतरता है और प्रचारित किया जाता है कि आंदोलन करने से कुछ नहीं मिलेगा इसलिए आंदोलन नहीं किया जाना चाहिए।
उधर किसान नेताओं के नेतृत्व में सिंचाई पानी के लिए क्षेत्र के किसान आंदोलन शुरू करते हैं। यह आंदोलन पूरे प्रथम चरण में बढ़ता जाता है, तो इसके समांतर सरकार द्वारा अपने नुमाइंदों की टीम को काम पर लगाया जाता है। सरकार इसे ‘किसानों का डेलिगेशन’ नाम देकर पंजाब भेजती है। इधर, भारतीय किसान संघ के वही लोग जो आंदोलन न करने की सलाह दे रहे थे वे भी सिंचाई पानी की मांग को लेकर किसानों के समांतर धरना शुरू कर देते हैं। आंदोलन के दौरान किसानों का संख्या बल लगातार कम होता जाता है और अंततः किसानों को अनूपगढ़ में वार्ता के बाद आंदोलन को 27 फरवरी तक स्थगित करना पड़ता है।
बुडानिया ने कहा – “उस अंतिम वार्ता की तस्वीर को मुख्यमंत्री जी ट्वीट करते हैं और कहते हैं कि समझौता हो गया है और सरकार सिंचाई पानी की मांग पर उचित कार्यवाही करेगी। भारतीय किसान संघ भी अपनी दरी समेत लौट जाता है। इधर वह सरकार के नुमाइंदों का डेलिगेशन भी अपनी रिपोर्ट सौंपने की खानापूर्ति कर लौट जाता है। तीन दिन बाद खबर आती है कि पंजाब सरकार ने पानी देने से साफ मना कर दिया है।”
उन्होंने आगे कहा – “ये पूरा सीन जानकर एक बात समझ आ रही है कि सारा खेल किसानों की संख्या बल का है। आंदोलन सिरों की गिनती पर जीते जाते हैं। किसानों को सत्ता के खेल को समझना होगा, पानी संघर्ष से ही मिलेगा और उसके लिए घरों से निकलना होगा। किसानों के हजार दुश्मन हैं, सत्ता के चाटुकारों से अलग संघर्ष है और सरकार से अलग संघर्ष है। संघर्ष करेंगे तो ही सिंचाई पानी मिलेगा।”

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Author: India Meet Tv

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