पत्रकार बलजीत अटवाल।
बीकानेर, राजस्थान।

नोखा के केडली गांव के सरकारी विद्यालय में जलकुंड की पट्टियां टूटने से उसमें गिरने पर तीन छात्राओं की मौत के मामले में परिजन और ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर नोखा से पैदल रवाना हुए और 70 किमी पैदल चलकर बीकानेर कलेक्ट्रेट पहुंचे और धरने पर बैठ गए। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी सुप्रीमो एवं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने मोर्चा संभाला और देर रात को प्रशासन से वार्ता के बाद दोनों पक्षों में सहमति बन गई। परिजन चार दिन बाद छात्राओं के शव लेने को तैयार हुए।
18 फरवरी को नोखा के राप्रावि देवनाड़ा, केडली में जर्जर जलकुंड की पट्टियां टूटने से कक्षा तीन और दो में पढ़ने वाली तीन छात्राओं प्रज्ञा, रविना और भारती की मौत हो गई थी। उसके बाद से ग्रामीणों ने छात्राओं के शव लेने से इंकार कर दिया और नोखा अस्पताल के आगे धरने पर बैठ गए थे। शुक्रवार की देर रात जिला मुख्यालय पर प्रशासन और ग्रामीणों में वार्ता के बाद दोनों पक्षों में सहमति बन गई। इसके अनुसार, इस घटना में प्रत्येक मृतक छात्रा के परिजनों को ₹20 लाख की आर्थिक सहायता दी जाएगी। परिवार के एक सदस्य को संविदा में नौकरी दी जाएगी और बीडीओ व ब्लाक शिक्षा अधिकारी निलंबित किए गए।
वार्ता में कलेक्टर नम्रता वृष्णि, एसपी कावेन्द्र सिंह सागर सहित अनेक अधिकारी और ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल में मगनाराम केडली, प्रभु गोदारा, रामगोपाल बिश्नोई, विजयपाल बेनीवाल, रामनिवास कूकणां मौजूद रहे। करीब सात बजे बेनीवाल कलेक्ट्रेट पहुंचे और धरना स्थल पर ग्रामीणों को संबोधित किया। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही बताई और कहा कि तीन मासूम बच्वियों की जान गई जिनके शव चार दिन से अस्पताल के मुर्दाघर में पड़े हैं। सरकार को तत्काल आर्थिक पैकेज देना चाहिए। बेनीवाल ने अपने संबोधन में बीकानेर के नेता-मंत्री पर भी तंज कसते हुए कहा कि इस गंभीर मामले पर उनका एक बयान तक नहीं आया है।
बीकानेर कूच करने और बेनीवाल के बीकानेर आने की जानकारी मिलने पर प्रशासन अलर्ट हो गया। कलेक्ट्रेट पर बेरिकेड्स करीब 60 फिट आगे कर दिए गए। आरएसी, स्पेशल फोर्स और शहरी क्षेत्र के सभी पुलिस थानों के एसएचओ को तैनात कर दिया गया। वाटर कैनन, वज्र वाहन और फायर ब्रिगेड पहुंच गए। इसके अलावा इंटेलीजेंस के लोग सूचनाएं जुटाने में लगे थे। प्रशासन और पुलिस के अधिकारी पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए थे।