राजस्थान में कम वोटिंग से किसे फायदा- BJP या कांग्रेस? पहले चरण में 12 सीटों पर 57.87 % मतदान के मायने जानिए

पत्रकार मनजीत सिंह रावला

जयपुर राजस्थान

राजस्थान में 12 लोकसभा सीटों पर पहले चरण के मतदान में वोटिंग प्रतिशत में कमी दिख रही है। कांग्रेस चाहती है कि वोटिंग प्रतिशत कम रहे और भाजपा दावा कर रही है कि सभी सीटों पर जीत हासिल होगी। वोटिंग प्रतिशत घटने और बढ़ाने को लेकर कई सियासी मायने माने जाते हैं।

लोकसभा चुनावी समर को लेकर राजस्थान में पहले चरण के तहत 12 लोकसभा सीटों पर शुक्रवार को मतदान हुआ। इस दौरान ईवीएम मशीन में 114 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला बंद हो गया है। पहले चरण के मतदान को लेकर पिछले दो लोकसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो, इस बार वोटिंग परसेंटेज कम रहा है। चुनाव आयोग की ओर से जारी आंकड़ों में 12 लोकसभा सीटों पर 57.87 फीसदी मतदान रहा है। ऐसे में सियासी गलियारों में वोटिंग परसेंट घटने पर कई के मायने निकाले जा रहे हैं। वोटिंग परसेंटेज घटने को कांग्रेस अपने लिए फायदेमंद मान रही है। कांग्रेस इससे खुश नजर आ रही। जबकि भाजपा का दावा है कि राजस्थान में 25 में से 25 सीटों पर जीत हासिल होगी।

पिछली बात की अपेक्षा 5.84% फीसदी कम रहा मतदान
राजस्थान में पहले चरण के तहत वोटिंग प्रतिशत घटने पर कांग्रेस में खुश दिखाई दे रही है। कांग्रेस का अपना कयास हैं कि उन्हें फायदा मिलेगा। दूसरी ओर बीजेपी भी अपनी जीत को लेकर पूरी लेकर पूरी तरह निश्चित हैं। पहले चरण में गंगानगर, बीकानेर, चूरू, झुंझुनूं, सीकर, जयपुर ग्रामीण, जयपुर अलवर, भरतपुर, करौली, धौलपुर, दौसा, नागौर पर मतदान हुआ। लेकिन इन सीटों पर पिछली बार 2019 में 63.71% मतदान हुआ। जबकि इस बात काफी प्रयास के बाद भी इस बार इन सीटों पर 57.87 फ़ीसदी ही वोटिंग रही। जो पिछले आंकड़ों की अपेक्षा 5.84% कम है।

वोटिंग प्रतिशत को लेकर क्या रहता है ट्रेंड
वोटिंग प्रतिशत घटने और बढ़ाने को लेकर कई सियासी मायने माने जाते हैं। जब भी वोटिंग प्रतिशत बढ़ता है तो, माना जाता है कि लोगों ने सत्ता के विरोध में वोट किया है और वोटिंग प्रतिशत घटता है तो, यही कयास होते हैं कि मतदान सत्ता के पक्ष में हुआ है। यह अब तक के चुनाव में देखने को आया है। इस फार्मूले को राजनीतिक जानकार भी मानते हैं, लेकिन इस बार वोटिंग प्रतिशत घटने को कांग्रेस अपने लिए फायदेमंद मान रही है। जबकि बीजेपी अपनी जीत के लिए आश्वस्त है। हालांकि, वोटिंग प्रतिशत घटने से बीजेपी में भी कुछ चिंता भी है।

लोगों ने मोदी सरकार के खिलाफ दिया वोट
इस मामले में पीसीसी मेम्बर और प्रदेश कांग्रेस के पूर्व सचिव सुशील असोपा का कहना है कि अब तक की धारणा यहीं हैं कि जब भी वोटिंग परसेंटेज घटता है तो, सत्ता को फायदा मिलता है, लेकिन मेरा मानना है कि इस बार महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी से आमजन बुरी तरह परेशान है। इसके कारण लोग वोट देने में उदासीन रहे हैं। इसके कारण वोटिंग परसेंटेज भी घटा है। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव ललित तुनवाल का भी यही कहना है कि वोटिंग परसेंटेज घटने से बीजेपी को नुकसान हो सकता है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को हुए 12 लोकसभा सीटों के मतदान में कांग्रेस करीब आधा दर्जन सीटों पर मजबूत स्थिति पर है। मतदाताओं ने मोदी सरकार से उदासीन होकर वोट नहीं दिया है। इसका कांग्रेस को निश्चित रूप से फायदा मिल सकता है।

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Author: India Meet Tv

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