पत्रकार बलजीत अटवाल।
श्रीगंगानगर, राजस्थान।

कोरोना के वैक्सीन को लेकर सरकार की मंशा पर जनता द्वारा सवाल उठाने के अहम मुद्दे पर सीपीआई एम नेता एवं पंचायत समिति श्रीविजयनगर सदस्य पृथ्वीराज बुडानिया ने अपनी बेबाक राय व्यक्त की है।
बुडानिया ने कहा कि वर्ष 1978 में भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर पोलियो का टीकाकरण शुरू किया गया था। आज से ठीक 47 साल पहले। कितने वैक्सीन आज तक बने और लगे लेकिन कभी भी सरकार की मंशा पर किसी ने सवाल नहीं उठाए थे। लेकिन जब कोरोना का वैक्सीन आया तो इस सरकार की मंशा पर जनता ने सवाल उठाए।
उन्होंने कहा – “सरकारी कर्मचारियों को इसके लिए बाध्य किया गया, लोगों ने भरे मन से वैक्सीन लगवाए। इधर कोरोना का भय था उधर वैक्सीन का। तब गोदी मीडिया और अंधभक्तों का कहना था कि विरोधी लोग मोदी के विरोध में वैक्सीन का विरोध कर रहे हैं। वो अंधभक्ति का पीक समय था (हालांकि अब तादाद काफी घट गई है)। आज पता चल रहा है कि जनता उस वक्त अपनी जगह सही थी उनका शक सही था। इलेक्ट्रॉल बॉन्ड से मोटा पैसा लेने और वाहवाही के चक्कर में जल्दबाजी में वैक्सीनेशन करवाया गया।
वैक्सीनेशन के बाद हार्ट अटैक से हो रही मौतों के संबंध में बुडानिया ने कहा – “वैक्सीनेशन के बाद पिछले 2 साल से हम हार्टअटैक से हो रही मौतों की खबर पढ़ते हैं तो वो बढ़ी हुई सफेद दाढ़ी वाला चेहरा याद आ जाता है जो भाइयों और बहनों बोलता हुआ वैक्सीन का प्रचार कर रहा था। हालांकि जब कोविशील्ड से ब्लड क्लोटिंग के ख़तरे का खुलासा हुआ तो बदनामी के डर से वैक्सिंग सर्टिफिकेट से अपनी फोटो हटवा ली थी।
उन्होंने आगे कहा – “स्वस्थ युवा व्यक्तियों और बच्चों को अचानक हार्ट अटैक आने की वजह खून का थक्का जमना बताई जा रही है। इधर कोविशील्ड बनाने वाली कंपनी (AstraZeneca) ने माना है कि कोविशील्ड से ब्लड क्लोटिंग (थक्का जमना) का खतरा है। मतलब साफ है ये मौतें कोरोना वैक्सीन की वजह से हो रही हैं। क्या इतना पता चलने के बाद भी लोग अंधभक्ति में डूबे ऐसे ही मरते रहेंगे?”