पत्रकार बलजीत अटवाल।

अनूपगढ़, राजस्थान।
सीमावर्ती क्षेत्र में नशे के अवैध कारोबार में संलिप्त ड्रग माफिया के हौसले बुलंद है। ड्रग माफिया द्वारा क्षेत्रीय राजनीति में दखल देने के कारण जनप्रतिनिधि और प्रशासन भी इस संबंध में मूकदर्शक बने हुए हैं, कई सफेदपोश भी ड्रग माफिया का सहयोग कर अपना हित साध रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्र में ड्रग तस्करी व्यापक पैमाने पर हो रही है। बड़े तस्करों द्वारा अपने अपने हिस्से का माल हासिल करने के बाद इसे क्षेत्र के विभिन्न गांवों में मांग के अनुसार भेजा जाता है। जिसे स्पेशल कोड के जरिए तस्करी में संलिप्त स्थानीय व्यक्तियों को सुपुर्द किया जाता है। इस कार्य में बच्चे एवं महिलाएं भी शामिल हैं, यह लोग मासिक तौर पर ₹15 हजार से 20 हजार की कमाई के लालच में इसमें शामिल हो चुके हैं।
क्षेत्र में पोस्त, स्मैक, गांजा, अफीम और शराब की तस्करी एवं अवैध बिक्री के साथ-साथ मेडिकल नशे का कारोबार भी फल-फूल रहा है। प्रशासन के लाख दावों के विपरीत क्षेत्र में ड्रग का अवैध कारोबार बदस्तूर जारी है। मुखबिरी के आधार पर की जा रही कार्रवाई से ड्रग माफिया पर कोई आंच नहीं आती है, वहीं बड़े मगरमच्छ सकुशल अपना नशे का अवैध कारोबार चलाते रहते हैं।
गौरतलब है कि 31 मार्च, 2022 से नशे के अवैध कारोबार के विरुद्ध जनसहयोग से पोस्टर अभियान शुरू करने वाले बार संघ घड़साना के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट विजय सिंह झोरड़ के आत्महत्या प्रकरण के बाद क्षेत्र में जागरूकता अभियान ठप्प हो चुका है। उक्त चर्चित मामले में पुलिस थाना नई मंडी घड़साना के कुछ पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था और मामले में सरकार द्वारा एसओजी जांच शुरू की गई थी।
4 फरवरी, 2024 को पुलिस अधीक्षक राजेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में व्यापार मंडल भवन, नई मंडी घड़साना में आयोजित सीएलजी बैठक में सदस्यों ने क्षेत्र में बढ़ रहे नशे के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने की मांग उठाई। पुलिस अधीक्षक ने इस विषय पर स्थानीय मीडिया द्वारा उनसे पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए शिक्षण संस्थानों एवं गांवों में इस संबंध में जागरूकता लाने एवं ड्रग माफिया के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने की बात कही थी, लेकिन स्थिति विपरीत है।