पत्रकार बलजीत अटवाल।
फरीदकोट, पंजाब।

जैतो में श्रमिक नेता गोरा सिंह मत्ता पर पुलिस द्वारा किए गए अमानवीय अत्याचार के विरोध में 14 संगठनों की एक्शन कमेटी द्वारा लिए गए निर्णय के तहत 28 फरवरी को प्रातः 11 बजे SDM कार्यालय, जैतो के समक्ष ‘जबर विरोधी रैली’ का आयोजन किया जाएगा।
आल इंडिया मज़हबी सिक्ख वैलफेयर एसोसिएशन (रजि.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखमंदर सिंह गज्जनवाला ने ‘जबर विरोधी रेली’ को लेकर अपनी एक अपील में श्रमिक नेता गोरा सिंह मत्ता पर पुलिस द्वारा किए गए अमानवीय अत्याचार का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि यह कृत्य मानवीय अधिकारों के सरासर खिलाफ है। उन्होंने आह्वान किया कि श्रमिक नेता गोरा सिंह मत्ता को न्याय दिलाने और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग को लेकर सभी जन संगठन और नागरिक इस ‘जबर विरोधी रैली’ में शामिल होकर एकजुटता व्यक्त करें।
एक्शन कमेटी का आरोप है कि किसान एवं श्रमिक वर्ग के हित में आवाज बुलंद करने वाला गोरा सिंह मत्ता काफी समय से आप सरकार के क्षेत्रीय विधायक अमोलक सिंह एवं भ्रष्ट सिस्टम की आंखों में रड़क रहा था। विधायक की शह पर पुलिस थाना जैतो के एसएचओ राकेश कुमार द्वारा योजना बनाकर 31 जनवरी को गोरा सिंह मत्ता को बगैर गिरफ्तार किए अगवा कर लिया गया और सीआईए कार्यालय पर लेजाकर निर्वस्त्र कर, हाथ पैर बांध कर और उल्टा लटकाकर अमानवीय यातनाएं दी गईं। उसकी दोनों टांगों को बेरहमी से खींचा गया और जांघों पर भारी पाईप घुमाकर अंगों को नकारा करने की कोशिश की गई। पानी मांगने पर उसके मुंह पर टॉयलेट का पानी डाला गया। यही नहीं पुलिस ने इस कृत्य का लाइव वीडियो उन लोगों को भेजा जिनके कहने पर उसे अगवा किया गया और अमानवीय यातनाएं दी गईं। इस श्रमिक नेता का कसूर महज यह है कि वह नरेगा श्रमिकों के हित में आवाज बुलंद करता था और यह भ्रष्ट सिस्टम को मंजूर नहीं था।
एक्शन कमेटी की मांग है कि इस घटनाक्रम के आरोपियों क्षेत्रीय विधायक अमोलक सिंह, पुलिस थाना जैतो एसएचओ राकेश कुमार, डीएसपी और सीआईए इंचार्ज पर एससी, एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाए, अमानवीय यातनाएं दिए जाने से संबंधित धाराओं में भी मामला दर्ज किया जाए और पीड़ित श्रमिक नेता गोरा सिंह मत्ता को ₹10 लाख मुआवजा दिया जाए।