पत्रकार बलजीत अटवाल।

हनुमानगढ़, राजस्थान।
डॉ अंबेडकर नवयुवक संघ, हनुमानगढ़ के मीडिया चेयरपर्सन जसविंदर सिंह धालीवाल ने 28 जनवरी को प्रेस वार्ता में डोडा पोस्त बरामदगी केस में संगरिया पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि पुलिस अधिकारियों ने संगरिया तहसील के गांव हरिपुरा में डोडा पोस्त और नकद राशि की बरामदगी को लेकर दलित समाज के व्यक्ति महावीर प्रसाद मेघवाल को झूठे मुकदमे में फंसाने का प्रयास किया है।
धालीवाल के अनुसार, 27 मार्च, 2024 को सुबह 0 4 बजे हरचंद सिंह और इंद्रजीत सिंह के खेत में बनी ढाणियों से 06 क्विंटल 30 किलो डोडा पोस्त और ₹30 लाख, 30 हजार नकद पुलिस द्वारा बरामद किए गए थे। बरामद पोस्त को पवन चुघ नामक चालक की पिकअप गाड़ी में लादकर संगरिया थाने ले जाया गया और 192 नंबर का मुकदमा एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज किया गया। पुलिस ने इस बरामदगी का आरोप रामचंद्र उर्फ रामू बावरी पर लगाया, लेकिन फिर बड़े प्रलोभन में आकर पुलिस ने बरामदगी का स्थान बदलकर दलित समाज के व्यक्ति महावीर प्रसाद मेघवाल के खेत में दिखा दिया। बरामदगी वाली असली जगह और महावीर प्रसाद के खेत के बीच करीब 06 किलोमीटर की दूरी है। इस संदर्भ में वीडियो और अन्य सबूत भी मौजूद हैं, जो सच्चाई उजागर करते हैं। पुलिस ने रामू बावरी और अन्य प्रभावशाली लोगों से मोटी रिश्वत लेकर उन्हें बचाया। वहीं, रामू बावरी के घर से बरामद स्कॉर्पियो, वरना कार और चोरी की पिकअप गाड़ी को भी रिश्वत के बदले छोड़ दिया गया। इस घटना को लेकर सर्व समाज में भारी आक्रोश है। एसपी हनुमानगढ़, आईजी बीकानेर और डीजीपी राजस्थान से मांग की है कि इस मामले की जांच के लिए विशेष कमेटी गठित की जाए और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
धालीवाल ने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई, तो सर्व समाज एसपी कार्यालय के सामने आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। धालीवाल ने कहा कि यह घटना पुलिस की कार्यप्रणाली और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। दलित समाज के व्यक्ति को झूठे मामले में फंसाने का यह प्रयास न केवल निंदनीय है, बल्कि समाज में असमानता और अन्याय को भी उजागर करता है।