पत्रकार बलजीत अटवाल।

श्रीगंगानगर, राजस्थान।
नई मंडी घड़साना में डेढ़ दशक पूर्व निर्मित गंदे पानी की निकासी के नाले की स्थिति वर्तमान में दयनीय है। स्थानीय व्यापारिक संगठनों एवं मंडी विकास समिति बीकानेर के मध्य लंबे संघर्ष के उपरांत लाखों की लागत से अस्तित्व में आए इस प्रोजेक्ट को कालांतर में सहेजने संवारने की जहमत स्थानीय प्रशासन ने नहीं उठाई। हाल ही में घड़साना को नगरपालिका घोषित किया गया है, लेकिन बदहाल सफाई व्यवस्था को लेकर प्रशासन गंभीर नहीं है। 28 जनवरी को संयुक्त व्यापार मंडल घड़साना द्वारा अध्यक्ष दर्शन जसूजा के नेतृत्व में उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मांग की गई है कि कस्बे में गंदे पानी की निकासी की समस्या का उचित समाधान किया जाए।
इस संबंध में स्थानीय नागरिकों से समस्या के संबंध में बात करने पर अधिकांश ने इस दम तोड़ चुके प्रोजेक्ट के पुनर्निर्माण की आवश्यकता जताई है। स्थानीय प्रशासन केवल बरसात के मौसम के दौरान ही जलभराव की समस्या के चलते जेसीबी आदि की मदद से बंद पड़े नाले को खुलवाता रहा है। वर्षा जल की समुचित निकासी की व्यवस्था नहीं होने से निचले इलाकों में स्थिति दयनीय हो जाती है। अतिक्रमण एवं क्षतिग्रस्त नाले नालियों की वजह से अधिकांश जगह लोग लंबे अरसे से परेशानी झेल रहे हैं। विकल्प के तौर पर बनाए गए पताल नलकूप आदि भी कारगर नहीं है। भारी वर्षा के दौरान वर्षा जल की निकासी की प्रभावी व्यवस्था वर्तमान में नहीं है।
उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपने के बाद दूरभाष पर India Meet TV से वार्ता में राष्ट्रीय मोदी सेवा समिति के जिलाध्यक्ष रामचंद्र सारड़ीवाल ने कहा कि लंबे अरसे से इस समस्या को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधि सोए हुए हैं, आशा है कि स्थानीय प्रशासन भविष्य में नागरिकों की इस समस्या के दृष्टिगत इस गंदे पानी की निकासी के प्रोजेक्ट हेतु आवश्यक कदम उठाएगा।