बोलने का माद्दा रखते हैं तो सुनने का भी रखिए : पूर्व विधायक श्रीमती संतोष बावरी

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पत्रकार बलजीत अटवाल।



श्रीगंगानगर, राजस्थान।
राज्य सरकार द्वारा नवगठित जिले अनूपगढ़ को निरस्त किए जाने के बाद उपजे जनाक्रोश के क्रम में 11 जनवरी को जिला बचाओ संघर्ष समिति द्वारा व्यापार मंडल भवन, अनूपगढ़ में एक विशेष बैठक आयोजित की गई। सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय के तहत 17 जनवरी को अनूपगढ़ की सभी मंडियों को बंद रखा जाएगा।
बैठक में उपस्थित पूर्व विधायक अनूपगढ़ श्रीमती संतोष बावरी ने वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री एवं विधायक अनूपगढ़ श्रीमती शिमला नायक एवं अन्य नेताओं द्वारा उन पर लगाए गए आरोपों से आहत होकर अपनी प्रतिक्रिया जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें बैठक में आमंत्रित किया गया तो वे सीधे जयपुर से बैठक में उपस्थित हुईं हैं। उन्होंने कहा कि वे तब से संघर्ष समिति के साथ जुड़ीं हैं जब वे कोचिंग कर रहीं थीं। उन्होंने कहा कि कोई अब हमें बताएगा कि संघर्ष क्या होता है, उन्होंने मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को अनूपगढ़ को पुनः जिला घोषित किए जाने की मांग से अवगत कराया है। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि बोलने का माद्दा रखते हैं तो सुनने का भी रखिए। राजनीति से परे हमें एकजुट होकर अपने जिले के लिए संघर्ष करना चाहिए, हम जनता के साथ हैं।


पूर्व विधायक के संबोधन के बीच विवाद की स्थिति पैदा हो गई और उन्होंने कुछ समय बाद पुनः अपनी बात आगे बढ़ाई। एक बार यह लगा कि पूर्व विधायक श्रीमती संतोष बावरी एवं बैठक में मौजूद वर्तमान विधायक श्रीमती शिमला नायक लगभग आमने-सामने आरोप प्रत्यारोप की स्थिति में हैं।
गौरतलब है कि नवगठित जिले अनूपगढ़ को निरस्त किए जाने के विरोध स्वरूप सामाजिक संगठनों द्वारा अनूपगढ़ में आयोजित एक सभा में श्रीमती शिमला नायक ने कहा था – “अनूपगढ़ को जिला घोषित किए जाने पर जो नेता कहते थे कि हम जिला छीन कर लाएं हैं आज वे सभी (भाजपा के पूर्व विधायक) कहां हैं, उनकी ओर से कोई स्टेटमेंट आया है क्या?”

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