पत्रकार मनजीत सिंह रावला

अनूपगढ़ जिला बनने के बाद जिले की ताकत को लोग संजोकर रख नहीं पाए। विधानसभा चुनाव 2023 और लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा को नकारना और दुर्गति पर पहुंचाना भी सदा चर्चा में रहे।
श्री गंगानगर जिले के अनूपगढ़ जिले में गये विधानसभा अनूपगढ़ और रायसिंहनगर सीटें भाजपा को हराई गई*
भाजपा को खुशी नहीं हुई। इसके बाद श्रीगंगानगर लोकसभा सीट पर भी भाजपा को हराया गया। बीकानेर लोकसभा सीट पर अर्जुनराम मेघवाल की जीत तो हुई लेकिन लेखाजोखा समीक्षा में कोई खुशी नहीं हुई। मोदी के नाम पर भी भाजपा का पिछड़ना कलेजे पर चोट कर रहा था।
भारतीय जनता पार्टी तो जिलों की घोषणा के बाद से ही आरोप लगा रही थी कि कांग्रेस सरकार गहलोत सरकार ने रेवडिय़ां बांटी है और यह सच्च भी रहा था कि कुछ जिले तो किसी भी स्तर पर जिले बनाए जाने के लायक भी नहीं थे।
*भाजपा की भजनलाल शर्मा सरकार ने ललित के. पंवार की अध्यक्षता में समीक्षा समिति गठित कर दी*
उस समय से ही यह माना जाने लगा था कि कुछ जिले तो निश्चित ही खत्म कर दिए जाएंगे।
श्रीगंगानगर का जो क्षेत्र अनूपगढ़ जिले में गया वह वापस आ गया।
*भजन सरकार का खर्चे का कहना गलत नहीं है। आखिर जिलों को चलाने के लिए प्रशासन भवन और भारी खर्च*
जो किसी भी सरकार के लिए संभव नहीं होता। कांग्रेस सरकार लौटती तो उसके लिए भी संकट होता।
*सूरतगढ़ बनाया जाता लेकिन हर समिति ने ठुकराया*
सूरतगढ़ में सन् 1970 से जिले की मांग हो रही थी। सन् 1978 में पहली बार श्रीगंगानगर के भाग किए जाने थे कि जिस तरफ राजस्थान नहर क्षेत्र आबादियों का क्षेत्र का विकास हो रहा है और आगे भी संभावना है। सूरतगढ़ ही उपयुक्त था लेकिन नहीं बनाया गया। अनूपगढ़ बनाया गया तो सूरतगढ़ के लोगों ने एतराज नहीं किया। यही कहा कि उनका संघर्ष और उनका भाग्य जीता।