संपादक मनजीत सिंह रावला
अनूपगढ़ राजस्थान

15 अगस्त 2019 के दिन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में सबसे बड़ी जल मिशन योजना की शुरुआत हुई देश आजाद के बाद सबसे बड़ी दूसरी योजना है
5 वर्ष 3 महीने 17 दिन बाद भी योजना सफल नहीं हुई अधिकारियों का सबसे बड़ा हाथ भ्रष्टाचार में.?
अनूपगढ़ जिले में जल मिशन योजना को तार तार किया गया, जल मिशन की पाइपों में 4 वर्षों से नहीं आया पानी, ग्रामीणों के सूखी डिग्गियां हलका ग्रामीणों का कहना है कि गांव के अंदर आपको दूध, छाछ, दही, घी मिल जाएगा, लेकिन पीने के लिए पानी नहीं मिलेगा. 4 हजार के करीब पंचायत आबादी वाले गांव 9 PSD A में ग्रामीण ढाणियां वर्षों से पानी की समस्या से जूझ रहे हैं. पंचायत में जल जीवन मिशन योजना सिर्फ कागजों में ही सफलता की कहानी गढ़ रहा है, जबकि हकीकत ठीक विपरीत है.
राजस्थान के अनूपगढ़ जिले में जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है. यदि यह कहा जाए तो शायद गलत न होगा, क्योंकि विभागीय अधिकारियों व ठेकेदारों की मिलीभगत से यह महत्वपूर्ण योजना चूरू (अनूपगढ़) में फेल नजर आ रही है. इस योजना के तहत गांव-गांव में घर-घर तक लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है. लेकिन आज भी जिले की कई सारी ग्राम पंचायतो में यह योजना हांसिए पर है. केन्द्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासो से संचालित हो रही इस योजना में करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, लेकिन अनूपगढ़ जिले के रावला तहसील के गांव 9 PSD A में शासन की जल जीवन मिशन योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है.
ढाणियां में ना जल मिशन योजना की पाइप लाइन डाली गई है, ना वर्षों से जल मिशन योजना नहीं आई एक बूंद पानी’ आया ग्रामीणों और ढाणियों के लोगों का कहना है कि चक की ढाणियों के अंदर आपको दूध, छाछ, दही, घी मिल जाएगा, लेकिन पीने के लिए पानी नहीं मिलेगा. 4 हजार के करीब आबादी वाले पंचायत में ग्रामीण वर्षों से पानी की समस्या से जूझ रहे हैं. 9 PSD गांव में जल जीवन मिशन योजना सिर्फ कागजों में ही सफलता की कहानी गढ़ रहा है, जबकि हकीकत ठीक विपरीत है. गांव में योजना का हाल बेहाल है. ग्रामीणों का आरोप है कि घटिया निर्माण, अधूरा निर्माण और करोड़ों रुपये के ठेकेदारों को भुगतान एक बड़ा खेल हो गया, लेकिन क्षेत्र के ग्रामीणों को पानी नहीं मिला. गांव की महिलाओं ने बताया कि पिछले जल मिशन योजना की पाइपों में एक बार भी नलों में पानी नहीं आया, जिसके चलते हमें टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ता है, जिससे आर्थिक नुकसान हो रहा है. टैंकर वाले एक हजार 500 से 700 रुपए वसूल करते हैं. ऐसे में हमें दूर दराज से पानी लाना पड़ रहा है
उधर सरदार बोहड़ सिंह ने बताया है कि हमारे साथ अच्छा खिलवाड़ किया है 3 पीएम 2 पीएम ढाणियों में पाइप लाइने नहीं बिछाई गई,जब हमे सुना था कि देश के प्रधानमंत्री ने जनता को योजना दी है हम लोग बहुत खुश हुए,लेकिन 4 वर्ष बीतने के बाद भी हमें फिलिंग 1990 वाली आ रही है, क्योंकि जल मिशन योजना देखने सुनने में बहुत अच्छी है,लेकिन धरातल पर फैल साबित हुई है,जब हम अधिकारियों से कहते है कि हमारे पाइप डालो तो हमे जवाब मिलता है कि आपकी ढाणियों के सर्वे नहीं हुआ अभी पाइप नहीं डालेगी,इससे साफ जाहिर होता है पूर्व में सरपंचों के तहत ढाणियों को सर्वे करते समय दर किनार किया गया है, अब हमे जल मिशन योजना का लाभ दिया जाए वरना ,विभाग के खिलाफ धारणा प्रदर्शन करेंगे
उधर जल मिशन योजना के खिलाफ तहसीलदार रावला का घेराव किया गया था,संघर्ष समिति के अध्यक्ष युवा नेता विष्णु भांभू ने बताया है कि ,हमारे साथ खिलवाड़ किया गया है,जब समझौता होता है,उस समझौते को कागज समझ कर रद्दी में फेंक दिया है,आज तक रावला तहसील की सभी पंचायतों में जल मिशन योजना फेल साबित हुई है ,
विष्णु ने बताया है कि 10 महीने पूर्व में जल जीवन मिशन के तहत रावला तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में हुए कार्यों की निष्पक्ष जांच को लेकर तहसील कार्यालय में वार्ता हुई। वार्ता में जल जीव निमशन में हुए कार्यों की जांच के लिए कमेटी का गठन करने का िनर्णय लिया गया। कमेटी में जन स्वास्थ्य अभियांत्रि की विभाग खंड अनूपगढ़ के अधिशासी अभियंता जितेंद्र झाम्ब, सहायक अभियंता एवं तकनीकी सहायक संजय कुमार एवं खंिडया लेखाकार चंद्र मोहन को शामिल किया गया था । ग्रामीणों का कहना है वार्ता में राजस्व तहसीलदार समझौते के आदेश की आवेलना है,इन कमेटी के अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की मांग की है,और जनता के साथ झूठा आश्वासन पत्र देने का मुकदमा होना चाहिए ,
लेकिन आश्वासन ही था ना कि जांच का कोई विषय ,सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार इस विभाग के जिला अधिकारी के रिश्तेदार भाई जल मिशन योजना का बड़ा ठेकेदार है इस लिए ठेकेदार के तार ऊपर तक जुड़े हुए है,ग्रामीणों ने कहा है कि जल मिशन योजना अनूपगढ़ जिले की जांच एसीबी राजस्थान से होनी चाहिए,क्योंकि करोड़ो का भ्रष्टाचार हुआ है किसी भी पंचायत में जल मिशन योजना का लाभ पूर्ण नहीं मिला PHED विभाग का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार सामने आ सकता है.?