करणी माता को 15000 किलो हलुए का लगाया भोग:20 क्विंटल आटा, 113 टीन देशी घी, 36 क्विंटल चीनी और 1.25 क्विंटल ड्राई फ्रूट्स से तैयार हुआ महाप्रसाद..!

पत्रकार मनजीत सिंह रावला

बीकानेर

देशनोक में बुधवार को श्री करणी माता मंदिर में अश्विन शुक्ल पक्ष चतुर्दशी के दिन मां करणी को महाप्रसादी का भोग लगाया गया। श्री करणी मंदिर निजी प्रन्यास के अध्यक्ष बादल सिंह ने बताया- पंडित नरोत्तम दास मिश्रा ने आज सुबह विधिवत पूजा-अर्चना कर मां करणी को मंत्रोच्चार करवाकर पोशाक धारण करवाई । पूजन के बाद 15000 किलोग्राम के हलुए का भोग लगाया गया।

महाप्रसादी का आयोजन पुष्पा कंवर आढ़ा और डॉ. कैलाश सिंह चारण आसावत परिवार खिंनावड़ी जैतारण की ओर से करवाया गया। डॉ. कैलाश दान ने बताया कि मां करणी की लीला अपरम्पार है। आज मां करणी के आशीर्वाद से महाप्रसादी का आयोजन हुआ है। महाप्रसादी का विधिवत पूजा-अर्चना भोग लगाने के बाद पूरे देशनोक कस्बे व श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है। इससे पहले मंगलवार शाम को भव्य भजन संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें देर रात तक मां करणी की चिरजाओ का गुणगान किया गया।

तय मात्रा में सामग्री का मिश्रण और बरसाती पानी का उपयोग

महाप्रसाद के लिए हलवा, बूंदी या लापसी का भोग लगता है। पवन कुमार पंचारिया ने बताया कि इसके लिए मिश्रण, अनुपात और वजन सब तय होता है। करीब 113 टिन देसी घी, 37 क्विंटल चीनी, 20 क्विंटल आटा और करीब सवा क्विंटल ड्राई फ्रूट्स का मिश्रण होता है। इस महाप्रसादी में केवल मंदिर के अंदर बनी बावड़ी के बरसाती पानी का ही उपयोग होता है।

महाराजा गंगा सिंह ने शुरू की थी परंपरा

मंदिर प्रन्यास ट्रस्ट के उपाध्यक्ष सीतादान बारहठ इस महाप्रसादी के इतिहास पर बात करते हुए कहते हैं कि देशनोक मंदिर में बीकानेर रियासत के महाराजा गंगा सिंह के समय से यह परंपरा शुरू हुई। लंबे समय तक केवल राज परिवार ही इस आयोजन को कराता रहा लेकिन बदलते समय में अब आम श्रद्धालु भी इसे करने में लग गए। अपनी मन्नत पूरी होने पर वे मां के दरबार में आते हैं और महाप्रसाद का आयोजन करते हैं।

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Author: India Meet Tv

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